Tuesday, February 25, 2025

शिवरात्रि

 शिवरात्रि

                   Photo credit @ Roop Singh 

शिवरात्रि


कांपे धरा, कराहे अम्बर…
करे दानव–देव शिवा शिवा…
उफान समंदर को छूए हिमालय…
मानव–जनावर करे शिवा शिवा…
ब्रह्मा–विष्णु भजे तोहुकु…
नारद–सारद करे शिवा शिवा…

तेरे क्रोध के आगे काल न ठहरे..
धरदो त्रिशूल, महाकाल शिवा….!

नंदी-संदी सब पांव में लोटे…
अरज कर रही गौरा माँ…
गणेश–कार्तिकेयन हाथ जोड़ खड़े हें…
विनत कर रही चहुं दिशा…

शिवा शिवा – शिवा शिवा…
गुरुजन की तो मानो हे नाथ शिवा…
धरदो त्रिशूल शिवरात्रि को ओसर् हे..

करने दो वंदना डूब के धुन में…
शिवा शिवा – शिवा शिवा…..

©@ Roop Singh  07/03/16

हर हर शम्भू ...🙏

Tuesday, January 7, 2025

पीड़ा

 पीड़ा

                     Photo credit @ Roop Singh 

पीड़ा 


हृदय टूट टूट कर गिरता है...
बड़े सलिखे से...
जैसे गिरता है झरना ...
कभी कभी तो बहुत उँचे से भी...

तब पीड़ा तो बहुत उठती है...
क्या कहते हो ? बहुत उठती होगी ना !...
और उठता है, एक सुर संगीत का भी...
साथ ही साथ....

मधुर ! पर पीड़ा दायक!
जो चीरता है, छाती को....!!
दबे स्वर में. ..!!

वेदना का गुबार..
उठता है दबता है, फिर उठ जाता है...
कंठ भर आता है, गाड़े शहद सा...
नैनो में उमड़ता है सागर ...

और मुख पर देखो ! 
तब भी खिली रहती है एक हंसी...
जो ख़ुशी ख़ुशी विदा लेना चाहती है...
अब भी...!!
इस गहरी उदास कर देने वाली पीड़ा से....!! 

(c) @ Roop Singh 25/03/21